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लाल किताब में बुध ग्रह का महत्व - budh in lal kitab

बुध




लाल किताब के अनुसार जन्म कुण्डली में स्थित बुध की स्थिति से सट्टा, लॉटरी, शेयर्स का आकलन किया जाता हे। बुध अधिष्ठित जातक व्यापारी, ज्योतिषी रहता है। इस ग्रह से ज्योतिष विद्या, शिल्पकला, दस्तकारी, बुद्धिमत्ता का अध्ययन किया जाता है। इस ग्रह का प्रभाव जातक की गर्दन एवं कंधो पर विशेष रूप से पड़ता है। यह प्रभाव 32 से 34 वर्ष की उम्र तक रहता है। आइये जानते है बुध के बारे में 









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वृषभ, सिंह, कन्या, तुला, मिथुन राशियों में शुभ तथा कर्क राशि में अशुभ रहता है। चन्द्र, बृहस्पति, शुक्र के साथ बैठा बुध शुभ फल देता है। अकेला बुध निरपेक्ष रहता है। दूसरे, चौथे, छठे घर में बैठा बुध राजयोग का कारक होता है। 

तीसरे और आठवें घर में बैठा budh planet  सूर्य को सहायता देता है। 9 और 12वें घर में बैठा बुध शनि को प्रबल करता है। सातवें घर में बैठा बुध पारसमणि का काम करता है जो भी ग्रह साथ हो उसे तार देता है। वर्ष फल के अनुसार जब बुध नौंवें घर में आता है तब अपनी अच्छाई या बुराई प्रकट करता है।

         lal kitab के अनुसार हरा रंग, चौड़े पत्ते वाले वृक्ष, कंठी वाला तोता, मींगने डालती हुई दूध देने वाली बकरी, दाढ़ी वाला बकरा, चमगादड़ ये सब बुध की चीज़े है। बुद्धिमता, सिर, जुबान भी बुध की ही चीज़े है।

         दो ग्रहों की शक्ति को अपने प्रभाव में बदलने की ताकत इसके पास है. दो दुश्मनों के बीच में भी अच्छा काम करते रहना अच्छा बुध वाला वयक्ति ही कर पाता है. 

कुंडली में यदि शुक्र नीच हो जाये तो बुध सहायता नही करता है. यदि सूर्य और मंगल खराब हो तो बुध के सहायता लेनी चाहिए। बुध यदि बलि ग्रह के साथ मिले तो उसकी शक्ति बढ़ा देता है और यदि निर्बल ग्रह के साथ हो तो उसकी शक्ति और कम कर देगा।

अच्छे बुध वाला वयक्ति अपनी बातों से ही कमाने का दम रखता है. हर किसी को अपना बनाने की कला उसके पास होती है.  

मंदे बुध की निशानी 

सामने के दांत गिर जाना 

सूंघने की क्षमता कम होना 

बुध यदि सूर्य या मंगल के साथ बैठे तो उसका प्रभाव कम हो जाएगा। 

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