जानें जन्म कुंडली में प्रेम विवाह के योग ( astrological yogas for love marriage)


 आज की वक़्त में युवाओं का किसी ज्योतिषी से सबसे पहला सवाल जो होता है वो होता है love marriage.और लव मैरिज उनकी प्राथमिकता होती है.इस बारे में वैदिक ज्योतिष में भी कुछ योग बताये गए है. आईये जानते है  के किसी  कुण्डली के कौन से योग प्रेम विवाह की संभावनाएं बनाते है.








जन्म कुंडली में प्रेम विवाह के योग ( astrological yogas for love marriage)


 जब किसी व्यक्ति कि kundli  में मंगल अथवा चन्द्र पंचम भाव के स्वामी के साथ, पंचम भाव में ही स्थित हों तब अथवा सप्तम भाव के स्वामी के साथ सप्तम भाव में ही हों तब भी प्रेम विवाह के योग बनते है.



 जब शुक्र लग्न से पंचम अथवा नवम अथवा चन्द लग्न से पंचम भाव में स्थित होंने पर प्रेम विवाह की संभावनाएं बनती है. (Venus in fifth or ninth house from ascendant or fifth house from Moon than there is chances of  love marriage)



 जब पंचम भाव में मंगल हों तथा पंचमेश व एकादशेश का राशि परिवतन अथवा दोनों कुण्डली के किसी भी एक भाव में एक साथ स्थित हों उस स्थिति में love marriage या affair marriage  होने के योग बनते है. 


 अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में पंचम व सप्तम भाव के स्वामी अथवा सप्तम व नवम भाव के स्वामी एक-दूसरे के साथ स्थित हों उस स्थिति में प्रेम विवाह कि संभावनाएं बनती है.



 कुण्डली में लग्न व पंचम भाव के स्वामी एक साथ स्थित हों या फिर लग्न व नवम भाव के स्वामी एक साथ बैठे हों, अथवा एक-दूसरे को देख रहे हों इस स्थिति में व्यक्ति के प्रेम विवाह की possibility  बनती है. 




 जब किसी व्यक्ति की कुण्डली में चन्द्र व सप्तम भाव के स्वामी एक -दूसरे से दृ्ष्टि संबन्ध बना रहे हों तब भी प्रेम विवाह की संभावनाएं बनती है.



 जब सप्तम भाव का स्वामी सप्तम भाव में ही स्थित हों तब विवाह का भाव बली होता है. तथा व्यक्ति प्रेम विवाह कर सकता है.



ये प्रेम विवाह के संबंध में सबसे प्रचलित योग माना जाता है  पंचम व सप्तम भाव के स्वामियों का आपस में युति, स्थिति अथवा दृ्ष्टि संबन्ध हो या दोनों में राशि परिवर्तन हो रहा हों तब भी प्रेम विवाह के योग बनते है. (Combinatin of fifth and the seventh house and mutual aspect or sign results love marriage)



 जब सप्तमेश की दृ्ष्टि, युति, स्थिति शुक्र के साथ द्वादश भाव में हों तो, प्रेम विवाह होता है.



 द्वादश भाव में लग्नेश, सप्तमेश कि युति हों व भाग्येश इन से दृ्ष्टि संबन्ध बना रहा हो, तो प्रेम विवाह की संभावनाएं बनती है. (Conjunction of lagna lord seventh house or aspect)




 जब जन्म कुण्डली में shani  किसी अशुभ भाव का स्वामी होकर वह मंगल, सप्तम भाव व सप्तमेश से relation  बनाते है. तो प्रेम विवाह हो सकता है.







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