क्या होती है शनि की साढ़े सती तथा ढैय्या





ज्योतिष में शनि ग्रह को हर बुरे काम से जोड़ कर दिखाया जाता है. इसमें  शनि ग्रह  की साढ़े सती तथा शनि के ढैय्या को बहुत ज्यादा  महत्व दिया गया  है। आज चर्चा करते है के क्या है शनि की साढ़े साती और ढैया और कैसे मिलते है इनके प्रभाव 














sade sati meaning in hindi astrology 


पहले बात करते है साढे साती की. astrology में शनि गोचर में जब जब व्यक्ति की चन्द्र राशि से 12वीं, पहली तथा दूसरी राशि में घूमते  हैं तो उस व्यक्ति की life में शनि की साढ़े साती मानी जाती है जो की परेशानी देने वाली मानी जाती है. 

इसका एक example आपको देता हूँ 





इस जन्म पत्रिका में चन्द्रमा 8 नंबर राशि यानि के वृश्चिक राशि में बैठा है. तो जातक की राशि वृश्चिक मानी जाएगी. जब शनि gochar में वृश्चिक 8 राशि से 12 यानि के  तुला, पहली वृश्चिक, दूसरी धनु में घूमेंगे तो उस person पर शनि की साढ़े सती का time बताया जायेगा। 


थोड़ा सा और clear कर देता हूँ, खगोल शास्त्र के हिसाब से शनि ग्रह (Saturn planet) एक 12 राशि 30 साल में पूरी करते है, एक राशि में शनि 2.5 साल रहे. साढ़े साती का असर 7.5 साल रहता है जैसा की इसके नाम से पता चलता है. तीन राशि में शनि साढे सात साल रहेगा. 



stages of sade sati 


साढ़े सती को 3 parts में divide किया जाता है जिसे चरण बोलते है पहले 2.5 साल पहला चरण उसके बाद 2.5 से 5 साल दूसरा चरण उसके बाद तीसरा चरण. 



dhaiya of shani  




अब बात करते है ढैया की जब-जब शनि गोचर में किसी kundali  में चन्द्र राशि से चौथी तथा आठवीं राशि में भ्रमण करते हैं तो कुंडली जातक  के ज़ीवन में ढैय्या का effect  माना जाता है. ढैया का मतलब ढाई साल. 



for example चन्द्रमा राशि वृश्चिक है तो उस से चौथी राशि कुम्भ और आठवीं  राशि मिथुन में जब शनि गोचर में घूमता हुआ आएगा तो उस व्यक्ति पर शनि की ढैया मानी जावेगा। 



अब बात practically करते है शनि साढ़े साती में 3 राशि और ढैया में 2 राशि को लेता है और कुल राशि है 12, इसका मतलब 40% जिंदगी तो शनि ही ले गया जो की प्रैक्टिकल life में देखने में नहीं आता. इसके अलावा लाइफ में  और भी परेशानिया है जो जरूरी नही के शनि ने ही दी हो और भी ग्रह जिम्मेदार हो सकते है. हालाँकि अभी और research जरूरी है जैसे की progression of chart




जिनकी कुंडली में शनि जन्म से ही बुरा हो 
शनि की साढ़े सती तथा ढैय्या जीवन में मुसीबतें आती हैं. यदि कुंडली में शनि अच्छा बैठा है तो इसका फायदा भी निश्चित मिलता है. इसलिए पहले शनि की स्थिति देखनी जरूरी है. 



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