राजा क्यों बड़ा होता है - वास्तु लेख


एक बहुत पुरानी कहावत है राजा पर घात नहीं चलती. मतलब के राजा पर किये कराये का असर नहीं होता. इसकी एक वैदिक कथा भी है और वास्तु शास्त्र में भी इसका संबंध स्थापित किया जा सकता है. 



प्राचीन समय में देवता और राक्षस हुआ करते थे, सब स्वतंत्र थे।  देवताओ का काम देव कार्यों को देखना व् राक्षस तमस में लीन थे. किसी पर किसी का आधिपत्य नहीं था. ऐसे में राक्षसों को जब भी कोई देव कार्य जैसे यज्ञ या कोई सीधी लेना जैसे कार्य करने हो तो सीधा उस देवता को बुला लेते थे जो उससे संबंधित होता था. 


इस लगातार कार्य से देवता परेशान हो कर ब्रह्मा जी के पास गए और ब्रह्मा जी ने सोच विचार कर एक मुखिया बनाने का निश्चय किया जो देवताओं को संगठित कर सके, इस प्रकार ब्रह्मा जी ने दुनिया के पहले राजा (इंद्र) का गठन किया और उनको चार देवताओं की अंश शक्ति प्रदान करी जो की कुबेर,यम,वरुण और इंद्र स्वयं की शक्ति दी जिससे इनपर कोई बाहरी प्रभाव ना आ सके. 


अब इन कथाओं से हम यदि वास्तु शास्त्र को जोड़े तो ये चारो देवता चार दिग्पाल कहलाते है जो चार दिशाओं के स्वामी माने जाते है, ये चारों अगर घर में सही है तो घर पर बाहरी प्रभाव आना आसान नहीं होता साथ एक आराम दायक जिंदगी मिलती है. 



वास्तु शास्त्र से संबंधित प्रश्न के लिए परामर्श ले सकते है. 

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